Answer for इन्सुलेशन क्या होता है ?

तारों से करन्ट के लीक होने से बचाने के लिये या दूसरे शब्दों में कहें तो सुरक्षा के दृष्टिकोण से तारों के उपर विद्युत कुचालक पदार्थों का एक कवर चढ़ाया जाता है। इसी सुरक्षात्मक कवर को ही इन्सुलेशन कहा जाता है। ये इन्सुलेशन कई प्रकार के होते हैं जैसे कपड़ा और सिल्क : इन विद्युत कुचालक पदार्थों का उपयोग तारों के सुरक्षात्मक कवर अर्थात् इन्सुलेशन के लिये किया जाता है।

कागज :
कागज का उपयोग अण्डर ग्राऊण्ड केबल में प्रथम इन्सुलेटर के रूप में किया जाता है। इसके लिये कागज को तेल में भिगोकर उसे तारों के उपर चढ़ाया जाता है। इसके बाद इसके उपर अन्य कई प्रकार के इन्सुलेटर्स लगाये जाते हैं।

रबड़ :
पेड़ों से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक रबड़ अर्थात् कच्चे रबड़ का उपयोग विद्युत तारों में इन्सुलेटर के रूप में नहीं किया जाता, क्योंकि यह रबड़ जल्दी पिघल जाता है। विद्युतीय कार्यों के लिये रबड़ में गंधक मिलाकर, रबड़ को पक्का बनाया जाता है। इस क्रिया को वल्केनाईजेशन कहा जाता है। इस तरह प्राप्त पक्के रबड़ का उपयोग अब तारों पर इन्सुलेटरों के रूप में किया जाता है। इन्सुलेटर चढ़े इन तारों को V.I.R. तार (या वेल्केनाईज्ड इण्डियन रबड़ वायर) कहा जाता है।

पी.वी.सी. :
पी.वी.सी. का पूरा नाम ‘पॉलीविनाईल क्लोराईड’ है। इसका उपयोग भी विद्युत तारों में इन्सुलेटर की तरह किया जाता है।

प्लास्टिक :
प्लास्टिक पदार्थों से इन्सुलेट किये गये तारों को फ्लेक्जिबल या प्लास्टिक वायर्स कहते हैं।

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