Answer for ई-मेल ब्लैक लिस्ट कैसी होती है

डीएनएस प्रणाली का अच्छी तरह से उपयोग ब्लैक लिस्ट की गयी ई-मेल होस्ट के आईपी पते को संग्रहित करने तथा डिस्ट्रीब्यूट करने के लिये किया जाता है। इसकी सामान्य विधि यह है कि उस होस्ट के आईपी पते को एक उच्च स्तर के सब-डोमेन में डाल दिया जाता है और विभिन्न रिकार्डों को सकारात्मक या नकारात्मक डिस्प्ले करने के लिये उस नाम का प्रयोग किया जाता है।
 
– इस blacklist.com के उदाहरण को निम्न प्रकार से समझ सकते हैं
 
102.3.4.5 को ब्लैकलिस्ट में डाला गया = > 5.4.3.102.blacklist.com बनाता है और 127.0.0.1 पर डालता है।
 
102.3.4.6 नहीं है =>6.4.3.102.blacklist.com नहीं मिलता, या डिफॉल्ट 127.0.0.2 ।
 
• इसके पश्चात ई-मेल सर्वर blacklist.com (ब्लैकलिस्ट.कॉम) से DNS प्रणाली के माध्यम से यह पता करने के लिये पूछताछ कर सकते हैं कि उनसे जड़ने वाला विशिष्ट होस्ट काली सूची में है या नहीं। आज इस तरह की अनेक ब्लैकलिस्ट या तो मुफ्त में या फिर मेम्बरशिप के आधार पर ई-मेल एडमिन के द्वारा और स्पैम विरोधी सॉफ्टवेयर का प्रयोग के लिये मुख्य रूप से उपलब्ध हैं।
 
– सॉफ्टवेयर अपडेट:
कई एंटी वायरस और कमर्शियल सॉफ्टवेयर अब नवीनतम सॉफ्टवेयर के अपडेट के लिये डीएनएस प्रणाली का उपयोग करते हैं जिससे क्लाइंट सर्वर को हर समय अपडेट सर्वर से जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तरह की एप्लीकेशन के लिये डीएनएस रिकार्ड का कैश समय आम तौर पर अपेक्षाकृत कम होता है।
 
– अपने रिकार्ड टाइप बनाने के बजाय प्रेषक नीति की रूपरेखा और डोमेन की चाबी जोकि TXT रिकार्ड है, को दूसरे डीएनएस रिकार्ड टाइप का लाभ उठाने के लिये डिजाइन किया गया था।
 
– कम्प्यूटर फेल होने की स्थिति में लचीलापन प्रदान करने के लिये प्रत्येक डोमेन को कवर करने के लिये आमतौर पर कई डीएनएस सर्वर उपलब्ध कराये जाते हैं और शीर्ष स्तर पर तेरह अत्यधिक शक्तिशाली रूट सर्वर हैं, तथा एनीकास्ट के जरिये उनमें से कई अतिरिक्त कॉपियां दुनियाभर में डिस्ट्रीब्यूट की गयी हैं।
 
– डायनामिक डीएनएस यूजर्स को गतिशीलता के कारण डीएनएस बदलने की स्थिति में अपना आईपी पता अपडेट करने की क्षमता प्रदान करता है।

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