Answer for केसिंग-केपिंग वायरिंग क्या होता है ?

इस प्रकार की वायरिंग का उपयोग घरेलू वायरिंग करने के लिये किया जाता है। क्योंकि यह देखने में अच्छी लगती है। केसिंग अच्छे सीजन्ड टीक वुड या सख्त लकड़ी की बनी होनी चाहिये। केसिंग में दो नालियाँ बनी हुई होती है। जिसमें तारें डालकर उसे केपिंग से ढक देते हैं। केसिंग की चौड़ाई केपिंग के बराबर होनी चाहिये। सबसे पहले दीवार पर एक-एक मीटर की दूरी पर लकड़ी के गुटके लगा दिये जाते हैं।
केसिंग-केपिंग लकड़ी के गुटके और केसिंग के बीच चीनी मिट्टी से बने गोल क्लीट लगाकर केसिंग को दीवार पर लगे गुटके पर कस देते हैं। इसके बाद केसिंग में तार डालकर उन्हें केपिंग द्वारा ढक दिया जाता है। पुरी वायरिंग कर लेने के बाद केसिंग केपिंग पर वार्निश लगा दी जाती है। इस प्रकार से केसिंग-केपिंग वायरिंग की जाती है।
केसिंग केपिंग वायरिंग करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ तथा बातें ध्यान में रखनी चाहिये
1. केसिंग-केपिंग अच्छी सीज्ड टीक की लकड़ी की होनी चाहिये, जिसमें गाँढ व दीमक नहीं होनी चाहिये।
2 .नमी से बचने के लिये केसिंग और लकड़ी के गुटके के बीच चीनी मिट्टी से बने गोल क्लीट का उपयोग करना चाहिये।
3. केसिंग की नालियाँ साफ व सूखी होनी चाहिये।
4. केसिंग को कभी भी दिवारों के अंदर नहीं दबाना चाहिये।
5. फेस तथा न्यूट्रल की तारों को अलग-अलग नालियों में ले जानी चाहिये।
6. जरूरत से ज्यादा तारें नाली में नहीं डालनी चाहिये।
7. दीवारों को पार करते समय तारों को PVC या कन्ड्यु ट के भीतर से ले जांए।
8. केपिंग को कसते समय तारों को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचनी चाहिये।
9. केसिंग को जमीन से लगभग 1.5 से 2 मीटर की ऊंचाई पर लगानी चाहिये।
10. केपिंग को लगाने के लिये 12MM लंबाई के पेंचों का उपयोग करना चाहिये।
11. वायरिंग पुरी कर लेने के बाद केसिंग-केपिंग पर वार्निश कर देनी चाहिये।

लकड़ी के गुटके के जैसी आजकल मार्केट में प्लास्टिक की गिट्टीयाँ भी मिलती हैं। मैसेनरी ड्रिल बिट के द्वारा दीवारों में छेद बनाकर इन प्लास्टिक की गिट्टीयों को उनमें डाला जाता है। इन गिट्टीयों में पेंच कसने पर यह दीवार के छेद के अंदर फैल कर दीवार को कस कर पकड़ लेती है। ये प्लास्टिक की गिट्टियाँ, लकड़ी के गुटकों से ज्यादा कारगर होती है। प्लास्टिक की गिट्टीयों के लिये दीवार को ज्यादा काटने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है।
इस प्रकार की केसिंग केपिंग वायरिंग कुछ समय पहले। तक उपयोग की जाती थी। आजकल इसका प्रचलन लगभग बंद सा हो गया है। इसके स्थान पर आजकल प्लास्टिक के केसिंग केपिंग का प्रचलन बढ़ गया। है। इसे भी लगाने केसिंग-केपिंग के लिए दिवार पर गिट्टी लगाना और प्रयोग करने की विधि समान ही है।
इस केसिंग-केपिंग वायरिंग की सबसे बड़ी खुबी यह है कि इसमें फेस और न्यूट्रल की तारें अलगअलग नालियों से होती हुई जाती है, अत: फेस और न्यूट्रल के बीच शार्ट सर्किट की संभावनायें समाप्त हो जाती है। इसलिये यह वायरिंग की एक सुरक्षित विधि है। केसिंग-केविंग में विभिन्न प्रकार के जोड़ लगाना दीवारों पर केसिंग लगाते समय उसमें कई प्रकार के जोड़ लगाने पड़ते हैं। जैसे केसिंग की लंबाई कम पड़ने पर उसके साथ केसिंग का दूसरा टुकड़ा जोड़ा जाता है। इसी प्रकार कहीं पर घुमाव देते या जंक्शन बनाते समय भी विभिन्न जोड़ बनाने पड़ते हैं।

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