Answer for गियर बॉक्स किसे कहते है ?

ट्रैक्टर का इंजन अपनी अधिकतम शक्ति पूरी चाल पर देता है। इस शक्ति से सामान्य दशा में तो ट्रैक्टर को चलाया जा सकता है, परन्तु ट्रैक्टर को ऊबड़-खाबड़ स्थानों, चढ़ाई, दलदल वाले स्थानों, कृषि यन्त्र जोड़कर एवं अन्य भारी कार्यों को करते समय चलाने की आवश्यकता भी पड़ती है। इसके अतिरिक्त कुछ सीमा तक गुरुत्वाकर्षण, विपरीत हवा का दबाव तथा चढ़ाई आदि के समय इंजन की सीमित शक्ति से काम नहीं चलता है। ऐसी स्थिति में किसी अन्य शक्ति की भी आवश्यकता होती है, जिससे ट्रैक्टर सरलता से चल या कार्य कर सके। इसके लिए इंजन की शक्ति को गियर लीवरेज (gear leverage) द्वारा गियर बॉक्स में बढ़ाने का प्रबन्ध किया जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि गियर बॉक्स एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके द्वारा ट्रैक्टरों को प्रत्येक परिस्थिति में सुगमतापूर्वक चलाने के लिए इंजन की शक्ति को गियरों के द्वारा बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ट्रैक्टर को पीछे (backward) चलाने की भी आवश्यकता पड़ती है और यह कार्य गियर बॉक्स के द्वारा ही सम्भव हो पाता है, क्योंकि इंजन की चाल की दिशा सदा एक-सी रहती है, उसे बदला नहीं जा सकता है।

गियर नियम Gear Rule
गियरों का एक नियम होता है कि यदि किसी छोटे गियर के द्वारा किसी अन्य बड़े गियर को चलाया जाए, तो बड़े गियर में छोटे गियर की अपेक्षा अधिक शक्ति स्थानान्तरित होती है, साथ ही उसकी चाल (RPM) कम हो जाती है। इसके विपरीत यदि किसी बड़े गियर के द्वारा किसी अन्य छोटे . गियर को चलाया जाए तो बड़े गियर की अपेक्षा छोटे गियर में शक्ति कम स्थानान्तरित होती है तथा चाल बढ़ जाती है। उदाहरणार्थ-A गियर में 10 दाँते (teeth) हैं तथा B गियर में 30 दाँते (teeth) हैं। यदि A गियर में तीन चक्कर प्रति मिनट (RPM) हो रहे हैं, तो B गियर में केवल एक ही चक्कर हो पाएगा अर्थात् उसकी चाल कम होगी। इसी के साथ-साथ यदि छोटे गियर में 5 फुट पौण्ड शक्ति एक चक्कर में प्राप्त हो रही है तो बड़े गियर में 15 फुट पौण्ड शक्ति स्थानान्तरित होगी। जब एक गियर के द्वारा दूसरा गियर चलाया जाता है, तो पहले वाले गियर की दिशा चलने वाले गियर की दिशा के विपरीत होती है। इसके अतिरिक्त यदि इन दोनों गियरों के बीच कोई तीसरा गियर लगाकर चलाया जाये तो चलने वाले गियर की दिशा घूमते समय समान हो जाएगी, इस प्रकार के गियर को आइडलर गियर कहते हैं।

गियर अनुपात Gear Ratio
जब दो गियर जिनके दाँते बराबर हों एवं उनको एक-दूसरे पर चलाया जाये, तो एक के चलाने पर दूसरा भी उसी गति से चलेगा, जिससे उसका गियर अनुपात 1:1 होगा, ऐसा तब होगा जब एक छोटा गियर जिसके छ: दाँते हैं, एक बड़े 18 दाँतों वाले गियर को चलाता है। ऐसे ही अगर छोटा गियर तीन चक्कर लगाए तो बड़े दाँतों वाले गियर का एक पूरा चक्कर होगा। इस अवस्था में गियर अनुपात 18:6 या 3:1 रहेगा। टार्क का सरल शब्दार्थ है- घुमाने की ताकत। जब हम एक गियर को दूसरे गियर से घुमाते हैं, तो वह दूसरा गियर घुमाने वाले की टार्क के कारण घूमता है तथा इनकी टार्क अनुपात यान्त्रिक लाभ पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर एक छोटा गियर, जिसमें 24 दाँते हैं। एक बड़े दाँतों वाले गियर को चलाता है, तो इससे बड़े गियर की स्पीड आधी रह जाएगी, लेकिन टार्क छोटे के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी और अगर हम बड़े गियर से छोटे गियर को चलाएँ तो छोटे गियर की स्पीड दोगुनी एवं टार्क के मुकाबले से आधी हो जायेगी। इसी कारणवश हम ऑटोमोबाइल में गियरबॉक्स लगाकर उच्च गति में कम टार्क और निम्न गति में ज्यादा टार्क ले पाते हैं।

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