Answer for टायर कितने प्रकर के होते है ?

आवश्यकता के अनुसार ट्रैक्टर में निम्न प्रकार के टायर प्रयोग किये जाते हैं

ठोस टायर Solid Tyre
इस प्रकार के टायर ठोस होते हैं। इसमें पंचर होने की सम्भावना न के बराबर होती है, क्योंकि इसमें हवा नहीं भरी जाती। इनका जीवनकाल लम्बा होता है। इन टायरों का प्रयोग अधिकतर बच्चों की साइकिलों में होता है।

वायवीय टायर Pneumatic Tyre
इस प्रकार के टायरों के अन्तर्गत ट्यूबलैस एवं टायर-ट्यूब सम्मलित होते हैं, क्योंकि इन दोनों टायरों में हवा को दबाव के साथ भरते हैं। इस हवा के कारण ही टायर लचकदार या गद्देदार प्रभाव प्रदान करते हैं। सामान्यता इन टायरों की आयु ड्रॉ-बार (draw-bar) हेतु प्रचालित स्थिति में लगभग 6000 घण्टे होती है।

टायर-ट्यूब Tyre Tube
इस प्रकार के टायर प्रकार को परम्परागत (traditional) टायर प्रकार भी कह सकते हैं। ट्यूबसहित एवं ट्यूबरहित टायर प्रकारों को उनकी काट की ढाँचागत भिन्नता के कारण स्पष्ट पहचाना जा सकता है। एक ट्यूबयुक्त टायर में ढाँचा मुख्यतः विभिन्न लोड देने वाली मूल रचना होती है और इसमें रेयॉन या किसी अन्य उपयुक्त पदार्थ के ? (धागों) से एक विशेष तरीके से बुनी हुई कुछ परतें होती हैं। टायर को रिम से बाहर न निकलने देने के लिए ये परतें उच्च सामर्थ्य वाले इस्पात के तारों से निर्मित दो रिंगों से संयोजित होती हैं। ‘बीड’ नामक ये रिंग पहिये के रिम में फिट हो जाते हैं। टायर के बाह्य भाग पर ट्रेड्स बने होते हैं, जिनकी संरचना व्यापार, पकड़, शोर व घिसाई (wear) को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। टायरों की साइडों का डिजाइन ऐसा होता है कि वे चलते समय बिना चटके मुड़ सकें। इन टायरों में ट्यूब डाले जाने की व्यवस्था होती है और उसमें उचित मात्रा तक हवा भरी जाती है। हवा भरने के उपरान्त लचीली ट्यूब टायर के रिक्त स्थान में फैल जाती है और टायर को सहारने का काम करती है।

ट्यूबरहित टायर Tubeless Tyres
इस अध्याय में अभी तक वर्णित टायरों के अन्दर ट्यूब फिट किए जाते हैं तथा उनमें हवा भरी जाती है, परन्तु आज बिना ट्यूब के टायरों का आविष्कार कर लिया गया है, जो धीरे-धीरे आम प्रचलन में भी आने लगे हैं, क्योंकि इनमें ट्यूब का प्रयोग नहीं होता है, इसलिए इन्हें ट्यूबरहित टायर कहा जाता है। इस प्रकार के टायरों में मुलायम रबर की एक तह अन्दर की ओर लगी रहती है। रिम पर जब इसे चढ़ा दिया जाता है तो ये एयर टाइट हो जाते हैं, क्योंकि रिम की आउटर सर्फेस बहुत अच्छी बनी होती है। रिम में ही वाल्व बॉडी लगी रहती है, जिससे इस टायर में ही हवा भर दी जाती है। इस प्रकार के टायर प्रयोग करते समय रिम का पूर्ण रूप से सीधा होना अनिवार्य है अन्यथा इनमें से हवा लीक करने लगती है। इनकी सबसे बड़ी खराबी यह है कि यदि इसमें पंचर हो गया है अथवा हवा लीक कर रही है तो सम्पूर्ण टायर या रिम को पानी में डालकर चेक करना होता है। इन टायरों को भी अन्य टायरों के समान वल्केनाइजिंग करके ठीक किया जा सकता है।

Back to top button