Answer for दो स्ट्रोक और चार स्ट्रोक इंजन के बीच का अंतर

दो स्ट्रोक और चार स्ट्रोक इंजन के बीच का अंतर
दो स्ट्रोक इंजन चार स्ट्रोक इंजन
1.इसमें प्रायः पोर्ट होती हैं।
2.प्रायः क्रैंक केस सील्ड होता है।
3.प्रायः क्रैंक शाफ्ट स्पलिट अप होती है।
4. प्रायः कनेक्टिग रॉड सिंगल पीस होती है।
5. प्रायः पिस्टन डोम हैड होता है।
6.प्रायः त्रि-लुब्रीकेटिंग बियरिंग लगते हैं।
7.प्रायः वायुशीतलित सिलेण्डर हैड और ब्लॉक होता है।
8.कम स्थान घेरते हैं।
9.फ्लाईव्हील हल्का व छोटा होता है।
10. डिजाइन साधारण होता है।
11. प्रति सिलेण्डर एक स्ट्रोक में कई क्रियाएँ होती हैं।
12. फ्रैंक शाफ्ट के प्रति चक्कर पर प्रति सिलेण्डर एक स्पार्क मिलता है।
13. ईंधन जलने का समय कम होता है।
14. अधूरे कम्बशन से निश्चित हॉर्स पावर के लिए प्रति आउटपुट 50 से 60% मिलती है।
15. एग्जॉस्ट पोर्ट शीघ्र बन्द होती है। 1.इसमें वाल्व होते हैं।
2.क्रैंकचैम्बर के नीचे सम्प लगता है।
3.क्रैंक शाफ्ट मोनो ब्लॉक होता है।
4.कनेक्टिग रॉड स्पलिट अप टाइप होती है।
5.फ्लैट हैड पिस्टन होता है।
6.शैल टाइप फ्रिक्शनल बियरिंग लगते हैं।
7.प्रायः जल शीतलित (water cooled) किस्म के होते हैं
8.प्रायः ज्यादा स्थान घेरते हैं।
9.फ्लाईव्हील भारी व बड़े व्यास का होता है।
10.वाटर जैकेट्स के कारण डिजाइन कठिन होता है।
11.एक स्ट्रोक में एक ही क्रिया होती है।
12.प्रति दो चक्करों पर प्रति सिलेण्डर एक स्पार्क मिलता है।
13.काफी समय मिलने से कम्बशन पूरा होता है।
14. पूरे कम्बशन से निश्चित हॉर्स पावर के लिए प्रति लीटर आउटपुट100% होती है।
15.साइलेन्सर काफी देर काम करता है

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