Answer for प्लानिंग यूजर ऑथेन्टीकेशन सिक्योरिटी किसे कहते है

कम्प्यूटिंग के संदर्भ में यदि बहुत ही सरल भाषा में ऑथेन्टीकेशन को परिभाषित करें तो कह सकते हैं कि डेटा के एक अकेले टुकड़े की वास्तविकता को कन्फर्म करने का कार्य ऑथेन्टीकेशन कहलाता है। इसे इस तरह भी कहा जाता है कि ऑथेन्टीकेशन वह प्रक्रिया या प्रोसेस होता है जो वास्तविक रूप में किसी भी पहचान को कन्फर्म करता है। जैसे कि किसी व्यक्ति की पहचान को उसके साथ लाये दस्तावेजों से कन्फर्म करना।

– जिस प्रक्रिया से किसी की पहचान को कन्फर्म किया जाता है वह तीन वर्गों में विभाजित होती है। ये इस बात पर भी निर्भर होता है कि ऑथेन्टीकेशन के लिये किस फैक्टर का प्रयोग किया जा रहा है: इसमें कुछ यूजर की जानकारी पर निर्भर होता है, कुछ यूजर इस पर निर्भर होता कि यूजर के पास क्या है और कुछ यूजर खुद यूजर पर |

• ऑथेन्टीकेशन का प्रत्येक फैक्टर अपने में एलीमेंट्स की एक रेंज समाहित रखता है। इन्हीं एलीमेंटस के आधार पर किसी भी व्यक्ति की पहचान को वेरीफाई किया जाता है और इसके बाद ही सिस्टम को एक्सेस की परमीशन प्रदान की जाती है, ट्रांजेक्शन रिकवेस्ट को एप्रूव किया जाता है और अथारिटी की चेन को इस्टेबिल्स किया जाता है।

– सिक्योरिटी रिसर्च के अनुसार पॉजटिव ऑथेन्टीकेशन के लिये तीन मुख्य फैक्टरों को प्रयोग किया जाता है। ये फैक्टर निम्न होते हैं

नॉलेज फैक्टर: इसके अंतर्गत वे सूचनायें शामिल होती हैं जिन्हें यूजर जानता है। जैसे कि पासवर्ड, पासवर्ड का एक भाग, पास पैराग्राफ या फिर पर्सनल आइडेन्टीफिकेशन नंबर जिसे पिन भी कहते हैं शामिल होता है। इसमें चैलेंज रिस्पांस और सिक्योरिटी प्रश्न भी शामिल होता है।

.ओनरशिप फैक्टर: इसके अंतर्गत वे एलीमेंट आते हैं जो यूजर के पास होते हैं। इनमें रिस्ट बैंड, आईडी कार्ड, सिक्योरिटी टोकन, सेल फोन विद हार्डवेयर टोकन, सॉफ्टवेयर टोकन शामिल होते हैं।

इनहेरियेन्स फैक्टर: इसके अंतर्गत ऐसे एलीमेंट आते हैं जो यूजर से डायरेक्ट जुड़े होते हैं। इनमें फिंगरप्रिंट, रेटिना पैटर्न, डीएनए सिक्वेंस, सिग्नेचर, फेस, आवाज, बॉयो-इलेक्ट्रिक सिगनल या कोई अन्य बॉयोमेट्रिक आइडेन्टीफायर।

– कई बार सिक्योरिटी को और पुख्ता करने के लिये दो फैक्टरों पर आधारित ऑथेन्टीकेशन की जरूरत होती है। इनमें एक कार्ड और एक पिन नंबर शामिल होते हैं। कई बार सिक्योरिटी के स्तर को और बढ़ाने के लिये यूजर की ऊंचाई, वजन और फिंगर प्रिंट तक को शामिल कर लिया जाता है, लेकिन इसे भी टू-फैक्टर ऑथेन्टीकेशन ही माना जाता है।

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