Answer for बास्केट बुनाई कैसे होती है

यह बुनाई प्राय: मोटे कपड़ों के लिए की जाती है। मोटे कपड़े जैसे परदे, रजाईयां या सोफों के कवर, केसमैंट, मैटी, दसूती आदि जैसे वस्त्र बनाने के लिए ताने व बाने में एक धागा मोटा तथा एक पतला लिया जाता है। ताना पूरने के उपरान्त बाना डालते समय ताने के दो तार तथा बाने के एक मोटे धागे द्वारा गुंथाई शुरू करते हैं। किन्तु इसका तरीका भी प्लेन या सादी बुनाई की तरह गूंथने का होता स्केट बुनाई है। जब दो तार ताने के उठाते हैं तो उन दोनों की मोटाई बाने के एक तार के बराबर होनी चाहिए, नहीं तो बुनाई में झोल आ जाएगा। इसी कारण यह बुनाई ढीली होती है। इसको इसी कारण बास्केट या टोकरी बुनाई का भी नाम दिया गया है क्योंकि बांस की खपच्चियों से बनी टोकरियाँ भी इसी प्रकार से गुंथी होती हैं। इसीलिए यह वस्त्र देखने में आकर्षक लगते हैं किन्तु धोने पर सिकुड़ जाते हैं।

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