Answer for मैनुअल मेटालिक आर्क वेल्डिंग किसे कहते है ?

फ्लक्स कोटेड इलेक्ट्रोड का प्रयोग करते हुए हाथ द्वारा की जाने वाली वेल्डिंग को मैनुअल मेटालिक आर्क वेल्डिंग कहते हैं। इसमें मेटल को पिघलाने के लिए आवश्यक ऊष्मा इलेक्ट्रिक आर्क से प्राप्त होती है। यह आर्क इलेक्ट्रोड तथा जॉब को इलेक्ट्रिक धारा देकर प्राप्त की जाती है। इस आर्क से जॉब की धातु पिघलकर एक कुण्ड बनाती है, उसी कुण्ड में इलेक्ट्रोड की धातु भी पिघलकर मिल जाती है। इस प्रकार पिघली अवस्था में बेस मेटल (basemetal) तथा फिलर मेटल (fillermetal) आपस में मिलकर वेल्ड मेटल (weld metal) बनाती है। यह वेल्ड मेटल जमने पर एक पक्का तथा स्थाई जोड़ बनाती है। . मैनुअल मेटालिक आर्क वेल्डिंग में आवश्यक धारा ए.सी.या डी.सी. वेल्डिंग मशीन के द्वारा प्राप्त किया जाता है। जब इलेक्ट्रोड को जॉब के अति निकट लाया जाता है तो उनके मध्य उपस्थित हवा का कॉलम (column) आयनित (ionised) हो जाता है। इसके कारण इलेक्ट्रॉन इस कॉलम से पास (pass) होने लगते हैं तथा आर्क का स्वरूप ले लेते हैं। इस आर्क के रेसिस्टैन्स के कारण ऊष्मा उत्पन्न होती है। इस ऊष्मा का ज्यादातर ताप जॉब को पिघलाता है तथा शेष इलेक्ट्रोड को पिघलाने का काम करता है। इस आर्क का तापक्रम 3600°C से 4000°C तक हो सकता है। इलेक्ट्रोड से ऊपर एक विशेष प्रकार का फ्लक्स चढ़ा होता है जो धातु के साथ पिघलकर वेल्ड पूल (weld pool) के ऊपर तैरता रहता है तथा वेल्ड मेटल को वायुमण्डलीय गैसों के प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करता है। जब वेल्ड मेटल ठण्डी होती है तो यह फ्लक्स भी एक पपड़ी के समान वेल्ड बीड के ऊपर ही ठण्डा हो जाता है। इससे वेल्ड बीड धीरे-धीरे ठण्डी होती है। इस कारण बीड में थर्मल स्ट्रैसेस कम पैदा होते हैं। फ्लक्स होता है जो पिघली धातु को सुरक्षित रखती हैं। इस कारण इसे शील्डेड आर्क वेल्डिंग भी कहा जाता है। वेल्डिंग की स्पीड तथा फीड का नियन्त्रण हाथ द्वारा किया जाता है, इसलिए इसे मैनुअल मेटालिक आर्क वेल्डिंग कहा जाता है।

जॉब स्थितियाँ Job Positioning
वेल्डिंग करते समय कार्यखण्ड (workpiece) पाँच स्थितियों में रखा जा सकता है
1. फ्लैट स्थिति में,
2. तिरछी स्थिति में,
3. होरीजोण्टल स्थिति में,
4. वर्टिकल स्थिति में तथा
5. ओवरहैड स्थिति में।
फ्लैट स्थिति में वेल्डिंग करना सरल होता है। .

लाभ Advantages
1. अन्य वेल्डिंग प्रक्रियाओं की अपेक्षा यह सस्ती पड़ती है।
2. छोटे-छोटे कार्यों के लिए अधिक उपयोगी है।
3. दक्ष कारीगर ही अच्छी वेल्डिंग बीड बना सकता है।
4. ए.सी. तथा डी.सी. दोनों प्रकार की वेल्डिंग मशीनें प्रयोग की जा सकती हैं।
5. धारा को कम या ज्यादा करके हल्के व भारी सभी प्रकार के कार्य किये जा सकते हैं।
6. बहुत कम लाग
त से यह वेल्डिंग की जा सकती है।
7. वेल्डर तथा इसका उपयोगी सामान आसानी से उपलब्ध है।

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