Answer for लैड-एसिड सैल क्या होता है ?

लैड-एसिड सैल, कठोर रबर के पात्र में बनाया जाता है। इसमें धन तथा ऋण प्लेटों के दो समूह होते हैं। धन प्लेटों की संख्या, ऋण प्लेटों की संख्या से एक कम होती है। प्लेटों की कुल संख्या 11, 13,17,23,25 आदि होती है। प्रत्येक धन प्लेट दोनों ओर से कार्य कर सके,इसलिए ऋण प्लेटों की संख्या एक से अधिक रखी जाती है। दोनों प्रकार की प्लेटें, सीसे की जाली से बनी होती हैं और उनमें रैड-लैड (Ph.o) की लगदी जमा दी जाती है। सेल में तनु गन्धक का अम्ल (तनु H,03) इलेक्ट्रोलाइट के रूप में प्रयोग किया जाता है। प्लेटों को तली पर टिकाने के लिए पात्र में ‘गुटके’ (rests) बने होते हैं और उन्हें आपस में ‘शॉर्ट-सर्किट’ होने से रोकने के लिए ‘विभाजक’ (separator) प्रयोग किए जाते हैं। प्रत्येक सैल में एक छिद्रयुक्त ढक्कन (vent plug) अवश्य रखा जाता है जिसके द्वारा रासायनिक क्रियाओं में निकली गैसें बाहर निकल सकें। दोनों प्लेट समूहों के संयोजक सिरे बाहर निकालकर, पात्र को ऊपर से ‘सील’ कर दिया जाता है।
रासायनिक क्रियाएँ Chemical Actions लैड-एसिड सैल में निम्न चरणों में रासायनिक क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं। फॉर्मिंग (Forming) सैल में तनु गन्धक का अम्ल भरते ही यह क्रिया प्रारम्भ हो जाती है। यह कार्य प्राय: बैटरी विक्रेता द्वारा ही कर दिया जाता है।
Pbgo + 2H.SO2 → PbO, + 2PbSO, + 2HO
आवेशन (Charging) सैल में तनु गन्धक का अम्ल भरने के 10-12 घण्टे पश्चात् उसे डी.सी. स्रोत से जोड़ा जाता है, जिससे कि वैद्युतिक ऊर्जा को रासायनिक क्रियाओं के रूप में एकत्र किया जा सके। इस कार्य के लिए सैल के धन संयोजक को स्रोत के धन सिरे से और ऋण संयोजक को स्रोत के ऋण सिरे से जोड़ दिया जाता है और सैल में निम्न रासायनिक क्रियाएँ सम्पन्न होती हैं। .
Ho → 2H* + 0
(i) एनोड पर PbSO4 + H20 – PbO2 + H2SO4
(ii) कैथोड पर PbSO. + 2H’ → Pb + H.SO.
आवेशन क्रिया के फलस्वरूप सैल की धन प्लेटें लैड पर-ऑक्साइड (Pbog) की तथा ऋण प्लेटें स्पंजी-लैड (Spungy-lead) की बन जाती हैं। अनावेशन (Discharging) आवेशित सैल को लोड से संयोजित करने पर अनावेशन क्रिया प्रारम्भ हो जाती है।
Ho → 2H’ + 0–
(i) एनोड पर Pb02 + 2H’ + H.SO→ PbSO4 + 2HO
(ii) कैथोड पर Pb+ 0 + H,SO→ PbSO. + H2O
अनावेशन क्रिया के फलस्वरूप सैल की दोनों ही प्रकार की प्लेटें लैड सल्फेट (PbSO) की बन जाती हैं। रासायनिक क्रिया में जल के निर्माण के कारण अम्ल पतला हो जाता है अर्थात् आपेक्षिक घनत्व घट जाता है।

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