Answer for सर्वर कितने प्रकार के होते है

पिछले कई सालों से किसी एप्लीकेशन को क्लाइंट/सर्वर लाइनों के साथ विभाजित करने का विचार चलता रहा है, ताकि स्थानीय क्षेत्र नेटवर्क (LAN) सॉफ्टवेयर समाधानों के विभिन्न रूप तैयार किए जा सकें। ये साल्यूशन्स एक से ज्यादा विक्रेताओं द्वारा सॉफ्टवेयर पैकेजों के रूप में बेचे जाते हैं। बहरहाल, हर साल्यूशन ग्राहक को जिस तरह की सेवा देता है, उसके अनुरूप उसकी खास पहचान है। प्रस्तुत है आज के समय में प्रयोग किये जाने वाले सर्वरों के प्रकार
 
फाइल सर्वर:
फाइल सर्वर के जरिए ग्राहक यानी क्लाइंट (पीसी) किसी नेटवर्क पर फाइल दस्तावेजों के लिए फाइल सर्वर को अनुरोध भेजता है। यह बहुत आरंभिक किस्म की डेटा सेवा है। इसमें जिस डेटा के लिए अनुरोध किया गया है उसे पाने के मकसद से नेटवर्क पर संदेशों के कई आदानप्रदान की जरूरत पड़ती है। पूरे नेटवर्क पर फाइलों के साझा इस्तेमाल के लिए फाइल सर्वर बहुत उपयोगी है। दस्तावेजों, इमेजों, इंजीनियरिंग से जुड़े चित्रों और दूसरे बड़े डेटाबेसों का साझा भंडार बनाने के लिए ये अनिवार्य है।
 
डेटाबेस सर्वरः
डेटाबेस सर्वर के जरिए क्लाइंट एसक्यूएल अनुरोधों को संदेश के रूप में डेटाबेस को भेजता है। हर एसक्यूएल कमांड के परिणाम नेटवर्क पर वापस कर दिए जाते हैं। एसक्यूएल अनुरोध को प्रक्रिया का रूप देने (प्रोसेस करने) वाला कोड और आंकड़े एक ही मशीन में रहते हैं। यह सर्वर मांगे गए डेटा की तलाश में अपनी प्रोसेसिंग ताकत का इस्तेमाल करता है।खद डेटा की तलाश करने के लिए सभी दस्तावेजों को क्लाइंट को यह वापस नहीं कर देता, जैसा कि फाइल सर्वर के मामले में होता है। इसका परिणाम होता है वितरित प्रोसेसिंग शक्ति का कहीं अधिक कुशल इस्तेमाल ।
 
– इस नजरिए के साथ सर्वर कोड को विक्रेता इसमें शामिल करते हैं। न आपको अक्सर क्लाइंट एप्लीकेशन के लिए कोड लिखना पड़ता है। (इसका विकल्प यह है कि आप QUEST या PARADOX जैसे क्लाइंट खरीदें)। डेटाबेस सर्वर निर्णयसहायता सिस्टमों के लिए आधार मुहैया कराते हैं, जिसमें तदर्थ प्रश्नों और लचीली रिपोर्टों की जरूरत पड़ती है।
 
• रिमोट सर्वर:
रिमोट सर्वर के साथ क्लाइंट उन सुदूर प्रक्रियाओं को लागू करता है, जो सर्वर में एक एसक्यूएल डेटाबेस इंजन के साथ रहती हैं। सर्वर की ये सुदूर प्रक्रियाएं एसक्यूएल वक्तव्यों के एक समूह को लागू करती हैं। नेटवर्क आदान-प्रदान में अकेला अनुरोध/जवाब संदेश शामिल होता है। (यह डेटाबेस सर्वर के उल्ट है, जिसमें किसी लेन-देन के दौरान हर एसक्यूएल वक्तव्य के लिए के अनुरोध/जवाब संदेश होता है।) एसक्यूएल वक्तव्य तभी सफल होते हैं या एक इकाई के रूप में नाकाम हो जाते हैं। इन्हीं समूहबद्ध वक्तव्यों को लेन-देन कहा जाता है।
 
– एक्सचेंज सर्वरः
एक्सचेंज सर्वर के साथ आप क्लाइंट और सर्वर दोनों घटकों के लिए कोड लिखते हुए क्लाइंट/सर्वर एप्लीकेशन तैयार करते हैं।क्लाइंट घटक में आम तौर पर एक सहायक यूज़र इंटरफेस शामिल किया जाता है। सर्वर घटक में आम तौर पर किसी डेटाबेस के विपरीत एसक्यूएल लेन-देन शामिल होते हैं। इन एप्लीकेशनों को ऑनलाइन ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग या OLTP कहते हैं। ये लक्ष्य उन्मुख एप्लीकेशन होते हैं। OLTP एप्लीकेशनों में यह जरूरी होता है कि डेटाबेस की सुरक्षा और अखंडता पर कड़ा नियंत्रण बना रहे| OLTP के दो प्रकार होते हैं- TP LINE जो भंडार में रखी गई प्रक्रियाओं पर आधारित है और जिसे डेटाबेस विक्रेता उपलब्ध कराते हैं। दूसरी है TPHEAVY जो टोपी मोनिटर पर आधारित है और जिसे OLTP विक्रेता उपलब्ध कराते हैं।
 
ग्रुपवेयर सर्वरः
ग्रुपवेयर लिखित सामग्री, छवि, डाक, बुलेटिन बोर्ड और कामकाज से संबंधित जैसी अधपकी सूचनाओं को संभालने का काम करते हैं। ये क्लाइंट/सर्वर API समूहों से खास ग्रुपवेयर सॉफ्टवेयर भी बनाए जा सकते हैं। ज्यादातर मामलों में एप्लीकेशन किसी लिपि भाषा और फॉर्म आधारित इंटरफेसों को विक्रेता मुहैया कराता है। क्लाइंट और सर्वर के बीच संचार का माध्यम हर विक्रेता का अलग-अलग होता है। आखिरकार इंटरनेट ग्रुपवेयर का सबकी पसंद का मध्य माध्यम बन जाएगा।
 
– ऑब्जेक्ट सर्वर:
ऑब्जेक्ट सर्वर के साथ क्लाइंट/सर्वर एप्लीकेशन को संचार ऑब्जेक्ट्स के एक समूह के रूप में लिखा जाता है। क्लाइंट ऑब्जेक्ट सर्वर ऑब्जेक्ट के साथ ORB का इस्तेमाल करते हुए संवाद बनाते हैं। ORB का मतलब है OBJECT REQUEST BROKER यानी ऑब्जेक्ट अनुरोध बिचौलिया। क्लाइंट एक सुदूर ऑब्जेक्ट पर एक विधि लागू करता है। ORB उस ऑब्जेक्ट सर्वर श्रेणी के संकेतों की तलाश कर लेता है जिस विधि का अनुरोध किया गया है, उसे लागू कर देता है, और परिणामों को क्लाइंट ऑब्जेक्ट को लौटा देता है। यह जरूरी है कि सर्वर ऑब्जेक्ट को लौटा देता है। यह जरूरी है कि सर्वर ऑब्जेक्ट्स साझा उपयोग करने की सुविधा दें। ORB इन सबको एक साथ लाता है।
 
– वेबसर्वरः
वर्ल्ड वाइड वेब पहला विश्वव्यापी क्लाइंट/सर्वर एप्लीकेशन है। अपने सबसे सरल रूप में वेब सर्वर ग्राहकों (क्लाइंट) के नाम लेकर मांगने पर दस्तावेजों को उन्हें लौटा देता है। क्लाइंट और सर्वर HTTP नामक RPC जैसे प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करते हुए आपस में संवाद बनाते हैं। प्रोटोकॉल कमांड के एक साधारण समूह को परिभाषित करता है; कसौटियों को STRINGS के रूप में आगे बढ़ाया जाता है, जिसमें टाइप किए आंकड़ों के लिए कोई गुंजाइश नहीं होती।

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