Answer for सेकण्डरी हार्डनिंग किसे कहते है ?

ऊष्मा उपचार होने के पश्चात् हाई-स्पीड स्टील अत्यन्त कठोर तथा घिसाव प्रतिरोधी (abrasion resistant) हो जाती है। यह अधिक उच्च कार्यकारी तापमान (working temperature) पर भी अपनी हार्डनैस (hardness) बनाए रखती है। हाई-स्पीड स्टील के औजारों को 1100°C-1300°C के उच्च तापमान पर फोर्ज (forge) किया जाता है। फोर्जिंग के पश्चात् अनीलिंग की जाती है, जिससे धातु का ग्रेन स्ट्रक्चर समान हो जाए। इसके पश्चात् हार्डनिंग (hardening) तथा टेम्परिंग (tempering) की जाती है। इस प्रकार हाई-स्पीड स्टील के ऊष्मा उपचार में निम्न प्रक्रियाएँ होती हैं हाई-स्पीड स्टील में फोर्जिंग के कारण आई कठोरता दूर करने के लिए उसे 900°C पर चार घण्टे तक गर्म करने के पश्चात् 600°C तक 20°C/घण्टा की दर से बहुत धीमी गति से ठण्डा करने के पश्चात् शान्त हवा में ठण्डा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इस्पात को ऑक्सीकरण (oxidation) से बचाने के लिए भट्ठी में वातावरण को नियन्त्रित किया जाता है। स्टील को बन्द बॉक्स के अन्दर कोयले के चूर्ण, चूना, रेत में धीरे-धीरे ठण्डा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इससे ग्रेन स्ट्रक्चर यूनिफॉर्म (uniform) हो जाता है तथा मुलायम हाई-स्पीड स्टील प्राप्त होता है। हाई-स्पीड स्टील की अधिकतम उपयोगिता बढ़ाने के लिए उसे 1150°C-1350°C तक गर्म किया जाता है। इससे अधिकतम अलॉयिंग तत्त्व (alloving elements) तथा कार्बन ऑस्टेनाइट में घुल (dissolve) जाते हैं। इस तापमान पर ऑक्सीकरण (oxidation) बहुत तेजी से होता है, इसलिए पहले स्टील को लगभग 850°C तक गर्म करते हैं। इसके पश्चात् तेजी से हार्डनिंग तापमान (1150°C-1350°C) तक गर्म करते हैं। टूल को इस तापमान पर कुछ समय होल्ड (hold) किया जाता है, जिससे सम्पूर्ण धातु का तापमान समान हो जाए। अब टूल को ऑयल के अन्दर 425°C तक ठण्डा किया जाता है तथा इस तापमान पर होल्ड किया जाता है, जिससे समस्त धातु का तापमान 425°C हो जाए। अब इसको शान्त हवा में कमरे के तापमान (room temperature) तक ठण्डा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इससे टूल के अन्दर थर्मल स्ट्रेसेज (thermal stresses) पैदा नहीं होते। हार्ड की गई हाई-स्पीड स्टील में मॉर्टेनसाइट तथा कार्बाइड ऑस्टेनाइट में मिले रह जाते हैं। इससे टूल स्टील के कर्तन गुणधर्मों पर बुरा प्रभाव (bad effect) पड़ता है। ऑस्टेनाइट को बनने से रोकने के लिए गर्म करने के पश्चात् स्टील को सीधे -70°C से -80°C तक ठण्डा कर दिया जाता है। इसके पश्चात् टेम्परिंग की जाती है। इससे टूल स्टील की इन्टर्नल स्ट्रेसेस दूर होते हैं तथा साथ ही ऑस्टेनाइट मॉर्टेनसाइट में बदल जाता है। 100°C से 400°C तक टेम्परिंग करने पर हाई-स्पीड स्टील की हार्डनैस कम होती है, परन्तु 400°C से ऊपर टेम्परिंग करने से हार्डनेस बढ़ती है। इसको सेकण्डरी हार्डनिंग (secondary hardening) कहते हैं।

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