Answer for Process Annealing क्या होता है ?

यह एक सब-क्रिटिकल (sub-critical) अनीलिंग प्रोसेस है। इसमें धातु को लोअर क्रान्तिक बिन्दु (critical point) से भी नीचे तापमान तक गर्म किया जाता है। इसमें धातु का आंशिक पुनः क्रिस्टलन (partial re-crystallisation) होता है। इस प्रक्रिया को कोल्ड वर्किंग के द्वारा आई कठोरता को दूर करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इससे धातुएँ मुलायम (soft) हो जाती हैं, जिससे उन पर पुन: कोल्ड वर्किंग प्रक्रम किया जा सकता है।

फुल अनीलिंग Full Annealing
इस्पात को पूर्ण रूप से अनील करने के लिए उसे पहले क्रान्तिक परास (critical range) तक गर्म करते हैं, जहाँ यह ऑस्टेनाइट अवस्था में आ जाता है। तत्पश्चात् भट्ठी में ही धीरे-धीरे ठण्डा होने के लिए छोड़ देते हैं। यदि भट्ठी को प्रयोग में लेना होता है तो चूना पाउडर या रेत या राख में दबा देते हैं, जिससे ठण्डा होने की दर बहुत कम रहे। ऐसा करने से इस्पात अपना मूल ग्रेन स्ट्रक्चर (grain structure) प्राप्त करता है।

हार्डनिंग Hardening
हार्डनिंग विधि का प्रयोग धातुओं की कठोरता बढ़ाने के लिए किया जाता है। कठोरता (hardness) किसी पदार्थ का वह गुण है, जो खुरचे जाने, घिसने, घुसने या मशीनिंग (scratching, wearing, indenting or machining) का विरोध करता है। साधारणतः टूल तथा ऐसे मशीनी भाग जिन पर अधिक भार रहता है, कठोर किए जाते हैं; जैसे-डाइयाँ, बियरिंग तथा कर्तन औजार इत्यादि। हार्डनिंग प्रक्रिया के द्वारा हम ऐसे इस्पात को कठोर बना सकते हैं, जिनमें अन्य अलॉयिंग तत्त्वों के अतिरिक्त कम-से-कम 0.3% कार्बन हो।

फ्लेम हार्डनिंग Flame Hardening
फ्लेम हार्डनिंग के द्वारा हम उन्हीं इस्पात की वस्तुओं को केस हार्ड कर सकते हैं जिनमें 0.3 से 0.6% कार्बन होता है। ऑक्सी-एसीटिलीन टॉर्च के द्वारा तेजी के साथ स्टील की ऊपरी सतह को ऊपरी क्रान्तिक बिन्दु से लगभग 50°C ऊपर तक गर्म करके (ऑस्टेनाइट रेंज तक गर्म करके) साथ-ही-साथ पानी या ऑयल को स्प्रे करके क्वैन्चिंग करा देते हैं। इस प्रकार स्टील भागों की ऊपरी सतह तो कठोर (hard) बन जाती है जबकि कोर मुलायम तथा टफ (tough) ही बनी रहती है। इस प्रक्रिया को इसी कारण शैलो हार्डनिंग (shallow hardening) भी कहते हैं। कठोर की गई सतह की गहराई को, फ्लेम के तापमान, गर्म करने के समय तथा पानी के स्प्रे को नियन्त्रित करके कम या अधिक किया जा सकता है। इसके द्वारा हम स्थानीय कठोरता (local hardening) कर सकते हैं। इसके लिए मात्र उसी स्थान का तापमान हार्डनिंग तापमान तक बढ़ाया जाता है, जहाँ पर हार्डनैस बढ़ानी होती है। फ्लेम हार्डनिंग में क्वैन्चिंग के कारण थर्मल स्ट्रेस (thermal stress) पैदा हो जाती है। इसको दूर करने के लिए भागों को 180°C-205°C तापमान तक गर्म करके हवा में धीरे-धीरे ठण्डा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके द्वारा 3-6 मिमी मोटा केस हार्ड किया जा सकता है।

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