डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर क्या होता है

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itipapers Staff asked 2 years ago

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itipapers Staff answered 1 year ago

इनका प्रयोग काफी लंबे समय से होता चला आ रहा है। यह एक कपड़े के रिबन पर पिनों से दबाव डालकर कागज पर प्रिंटिंग करते हैं। यह आकार में दो तरह के होते हैं

1. 80 कॉलम प्रिंटर
2. 132 कॉलम प्रिंटर

दोनों में केवल आकार का फर्क है तकनीक एक ही है। 132 कॉलम का प्रिंटर ज्यादा चौड़े कागज का प्रयोग करता है। इसमें कागज की लंबाई कोई मायने नहीं रखती है।

इसके द्वारा की गई छपाई अच्छी क्वालिटी की नहीं होती है। लेकिन यह NLO मोड में अच्छी प्रिंटिंग करता है। जब कम कीमत में बहुत बड़ी मात्रा में डेटा प्रिंट करना होता है तो इसी प्रिंटर का प्रयोग किया जाता है।

• प्रिंटिंग तकनीक
⇨ इसमें प्रिंटिंग का कार्य एक हैड के द्वारा किया जाता है। इस हैड में 9 से लेकर 24 पिने तक होती हैं और यह हैड एक लचीली केबल के जरिए प्रिंटर के मदरबोर्ड से जुड़ा रहता है।

⇨ प्रिंटर को कम्प्यूटर से जोड़ने का कार्य प्रिंटर केबल के जरिए किया जाता है। कम्प्यूटर से सिगनल पाकर इसके हैड की पिनें बाहर की ओर दबाव बनाती हैं और यह दबाव हैड के आगे लगे हुए कपड़े के रिबन पर पड़ता है। जिससे रिबन के आगे लगे पेपर पर दबाव के अनुसार अक्षर या आकृति छप जाती है। निम्न चित्र में आप हैड की इस प्रक्रिया को देख सकते हैं

⇨ इस प्रिंटर में मैकेनिकल भाग बहुत ज्यादा होता है और धूल तथा गंदगी से इसके खराब होने की संभावना भी हमेशा रहती है। चित्र में इसके मैकेनिज्म को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं

⇨ इसके अतिरिक्त प्रिंटिंग करते – करते प्रिंटर की पिनें घिस जाती हैं और कभी – कभी अपने स्थान से भी हट जाती हैं। जिसकी वजह से सही अक्षर नहीं बन पाता है।

⇨ इस प्रिंटर को आप अपने कम्प्यूटर से जोड़ने के बाद विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम में इसका ड्राइवर इंस्टाल कर लें जिससे आप इसकी पूरी क्षमता का प्रयोग प्रिंटिंग में कर सकें।

⇨ यदि आपका डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर सही तरह से अक्षरों को प्रिंट नहीं कर पा रहा है तो आप दो काम कर सकते हैं। एक तो इसके रिबन को बदलकर देखें। यदि रिबन की स्याही समाप्त हो गयी है तो नया रिबन लें। निम्न चित्र में में आप एक तरह के रिबन को देख सकते हैं

⇨ ऐसा जरूरी नहीं है कि प्रिंटर का रिबन ऊपर दिये चित्र की तरह से ही हो। यह अलग तरह का भी हो सकता है। अलगअलग कम्पनियां प्रिंटर के मॉडल के अनुसार रिबना का निर्माण करती हैं। लेकिन प्रिंटर का हैड हमेशा एक जैसा ही होता है –

⇨ ज्यादातर प्रिंटरों में प्रिंट हैड को आगे-पीछे करने के लिये एक एडजस्टमेंट नोह होती है। इससे हैड को रिबन के पास करके अच्छी क्वालिटी की प्रिंटिंग कर सकते हैं।

⇨ कुछ कम्पनियों के प्रिंटरों को विंडोज़ अपने आप रिकग्नाइज नहीं कर पाती है। इसलिये इन प्रिंटरों को विंडोज़ में इंस्टॉल करने के लिये उसके ड्राइवर को इंस्टॉल करें। इसके बाद ही प्रिंटर को प्रयोग करें।

⇨ इन प्रिंटरों में ज्यादातर कॉन्टीन्यूएस स्टेशनरी प्रयोग की जाती है। ऐसे में इसके पेपर ट्रैक्टर में स्टेशनरी को उसके छेदों से सही ढंग से फंसाकर लगायें, अन्यथा इसमें पेपर बार बार उलझता रहेगा।

⇨ कम्प्यूटर से प्रिंटर को जोड़ने के बाद जब कम्प्यूटर को ऑन करें तो प्रिंटर को भी ऑन रखें।

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