प्रिंटिंग की क्या तकनीक होती है

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itipapers Staff asked 2 years ago

प्रिंटिंग की क्या तकनीक होती है डेस्कटॉप प्रिंटिंग क्या है ग्रेव्योर प्रिंटिंग क्या है प्रिंटिंग कानफिगरेशन के महत्वपूर्ण विकल्प क्या क्या है? प्रिंटिंग मशीन प्रिंटिंग का इतिहास फ्लेक्सोग्राफी क्या है प्रिंटिंग के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा कीजिये :

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itipapers Staff answered 1 year ago

⇨ इस समय जो प्रिंटर हैं उनमें या तो इंकजेट या फिर डाईसबलिमेशन तकनीक का उपयोग हो रहा है। डाईसबमिलेशन का मतलब हैरंगों को परिष्कृत कर देना।

⇨ इसमें पेपर पर गैसीय रंगों को डिफ्यूज किया जाता है और इससे बहुत ही हाई क्वालिटी वाला प्रिंट निकलता है। इसमें वैसे डॉट नहीं होते, जो इंकजेट प्रिंटिंग में निकलते हैं। उच्चकोटि के ग्राफिक संबंधी कार्यों के लिए इसे काफी अच्छा माना जाता है।

⇨ डाईसबमिलेशन तकनीक वाले प्रिंटर महंगे होते हैं। जबकि पोर्टेबल फोटो प्रिंटरों की कीमत मध्यम रेंज के इंकजेटों से थोड़ी ही ज्यादा है। जब तक आपको कोई विशेष प्रकार की ही जरूरत न हो, तो फिर इंकजेट फोटो प्रिंटर लेना ही बेहतर होगा।

⇨ इंकजेट प्रिंटर की अवधारणा और तकनीक के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं। इसमें दो तरह की तकनीक होती है- थर्मल और पीज़ो। हालांकि दोनों का काम करने का तरीका करीब – करीब एकसा ही होता है। बस फर्क सिर्फ इंक ट्रांसफर की विधि के उपयोग का है।

⇨ थर्मल इंकजेटों में प्रिंटहैड के नोजलों को गर्मी दी जाती है, ताकि भाप का बुलबुला पैदा कर सकें और इसी से थर्मल इंकजेटों को अक्सर बबलजेट भी कहते हैं। थर्मल इंकजेट को तकनीक 1980 में विकसित हुई थी। एचपी, कैनन और लैक्समार्क ये प्रिंटर बनाते हैं।

⇨ पीज़ो प्रिंटर में दबाव बनाकर स्याही की फुहार छोड़ी जाती है। इसके लिए प्रिंटहैड को बिजली से चार्ज कर नोजल पर दबाव बनाया जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल एप्शन काफी करता है। दोनों तकनीक में फर्क मामली-सा ही है, लेकिन इसके फायदे काफी हैं।

⇨ जैसे पीज़ो प्रिंटरों की शुद्धता काफी ज्यादा होती है। कैमरों और प्रिंटरों रेज़ोल्यूशन के फर्क के कारण कई बार इमेज रेज़ोल्यूशन को लेकर थोड़ा भ्रम-सा हो जाता है।

⇨ प्रिंटरों में रेज़ोल्यूशन डॉट प्रति इंच में नापी जाती है। जबकि डिजिटल कैमरों में इमेज में पिक्सेलों की कुल संख्या का उपयोग होता है। जैसे 3.4 मेगा पिक्सेल
⇨ यदि फोटो प्रिंटर हाई रेज़ोल्यूशन दे भी देता है, तो भी हो सकता है आप इसका उपयोग नहीं कर पाएं। प्रिंटर सिर्फ अपनी क्षमता की पूर्ति करता है, चाहे डिजिटल कैमरा बहुत ही पर्याप्त रेज़ोल्यूसन पर भी फोटो ले। इसी तरह हाई रेज़ोल्यूशन सिर्फ उसी सयम ठीक रहता है जब आप फोटो पेपर का प्रयोग कर रहे होते हैं।

⇨ जिस तरह प्रिंटर के रेज़ोल्यूशन का अपना महत्व होता है, उसी तरह पेपर पर स्याही डालने वाले ड्रॉपलेट के आकार का भी महत्व है। बाजार में ज्यादातर प्रिंटर चार पिकोलीटर या इससे कम के ड्रापलेट वाले होते हैं।

⇨ फोटो प्रिंटिंग में रंगों की अपनी भूमिका और महत्व है। प्रिंटर द्वारा किस तरह कंपन होती है, यह ज्यादा मायने नहीं रखता है। विंडोज में कलर मैनेजमेंट यूटीलिटी होती है जिसे आईसीएम (इमेज कलर मैनेजमेंट) कहा जाता है। इसमें इनपुट और आउटपुट डिवाइसों में कलर काफी आसानी से उपलब्ध रहते हैं। इमेज एडिटिंग एप्लिकेशन में आईसीएम या आईसीसी का उपयोग बखूबी किया जा सकता है। इसलिए ऐसा प्रिंटर लें जिसमें आईसीएम या आईसीसी जैसा कलर प्रोफाइल भी हो।

⇨ इसमें दूसरी चीज आती है – एक्सचेंजेबल इमेज फाइल जब एक पिक्चर में कलर स्पेस व सेटिंग्स से संबंधित कुछ सूचनाएं और जोड़ सकता है। एप्शन के प्रिंटरों पर इसे लिया जा सकता है। एप्शन का प्रिंट इमेज मैनेजमेंट मॉडल लें, उसमें यह मौजूद हो इसकी जांच जरूर कर लें।

⇨ जब भी प्रिंटर खरीद रहे हों, तो इस पक्ष को कभी भी नजरअंदाज नहीं करें। इंक रिफिल की लागत को जरूर देखना चाहिए। ज्यादातर कलर प्रिंटरों का एक बड़ा नुकसान यह है कि अगर एक भी इंक कार्टिज बदलनी पड़ जाएगी।

⇨ फोटो प्रिंटरों में छह या इससे ज्यादा रंगों में यह खामी काफी होती है। इसलिए कुछ प्रिंटरों में हर रंग के लिए अलग-अलग इंक कार्टिज होती है, ताकि जो धीरे चले या खराब हो उसे ही बदला जाए। इस प्रकार स्याही की मद में थोड़ी बचत यहां की जा सकती है।

⇨ दूसरी बात आती है पेपर की क्वालिटी को लेकर। आप प्रिंटर में कौन-सा कागज इस्तेमाल कर रहे हैं, इस पर काफी कुछ निर्भर करता है। पहले एक समस्या यह थी कि कुछ समय के बाद कागज धुंधला पड़ने लगता था। लेकिन अब कागज निर्माताओं ने ऐसे कागज तैयार कर लिए हैं जो गुणवत्ता में बहुत ही उच्चकोटि के हैं और उन पर उतरने वाले फोटो-प्रिंटों में वर्षों तक एडिटिंग सॉफ्टवेयर की कोई जरूरत नहीं है।

⇨ इसलिए यदि आप भी ऐसे ही उपयोक्ता की श्रेणी में आते हैं तो ऐसा प्रिंटर लें जो फ्लैश मेमोरी कार्ड को आपके कैमरे से प्रिंटर में सीधे ट्रांसफर कर दे। डायरेक्ट फोटो एडिटिंग नई नहीं है। सोनी और कैनन ने अपने कैमरों के साथ उपयोग कर सकने वाले 4 x 6 डाईसबमिलेशन प्रिंटर बनाए हैं। अब यह तकनीक इंकजेट बाजार में आसानी से उपलब्ध होती जा रही है।

⇨ हमेशा ऐसा फोटो प्रिंटर खरीदें जो कैमरे के मेमोरी कार्ड के साथ जुड़ सके। फ्लैश मेमोरी कार्ड मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं। ये हैं- कॉम्पैक्ट फ्लैश, एसडी और सोनी की मेमोरी स्टिक। यदि प्रिंटर में पीसी कार्ड स्लॉट है, तो आपको किसी फ्लैश मेमोरी के लिए एक उपयुक्त एडैप्टर खरीद लेना चाहिए।

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