लाइन इंट्रैक्टिल यूपीएस क्या होता है

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itipapers Staff asked 2 years ago

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itipapers Staff answered 1 year ago

एक लाइन इंट्रैक्टिल यूपीएस इन-लाइन इंवर्टर को मेंटटेन करता है और नार्मन चार्जिंग मोड से बैटरी के DC करेंट पाथ को रिडायरेक्ट करता है। जब बिजली चली जाती है तो यह इंवर्टर चालू हो जाता है और हमें बैटरियों के DC करेंट को AC करेंट में बदलकर उपलब्ध करता है। इसमें बिजली होने की अवस्था में बैटरी चार्जर बैटरियों को चार्ज करता रहता है।

इसमें AC करेंट जाने के बाद DC करेंट को प्रयोगकर्ता को उपलब्ध कराने में बहुत कम समय लगता है जिससे कम्प्यूटर सिस्टम ऑफ नहीं होता है।

इस तकनीक में यूपीएस के अंतर्गत मल्टी टैप वैरियेबल वोल्टेज ऑटो ट्रांसफार्मर का प्रयोग होता है। यह एक विशेष प्रकार का ट्रांसफार्मर होता है जो पॉवर को तारों की क्वाइल से एड कर सकता है और सब्सट्रैक्ट कर सकता है, जिसकी वजह से मैग्नेटिक फील्ड घटता और बढ़ता रहता है। इसका प्रभाव ट्रांसफार्मर की वोल्टेज आउटपुट पर भी पड़ता है। इसे बक बूस्ट ट्रांसफार्मर के नाम से जाना जाता है।

इस तरह की तकनीक वाले यूपीएस बिना रिजर्व पॉवर को प्रयोग किये हुये कॉन्सटेंट करेंट प्रदान करने में सक्षम होते हैं। इसमें मेन से चाहे कम करेंट आ रहा हो या ज्यादा, आगे एक दम स्मूथ और एक समान करेंट का प्रवाह होता रहता है। इसमें किसी तरह का कोई सर्ज (surges) नहीं होता है।

इसमें लगा 50/60 Hz का ट्रांसफार्मर लाइन वोल्टेज और बैटरी वोल्टेज के मध्य समायोजन का अनुपात बनाये रखता है। इसमें प्रयुक्त बक/बूस्ट तकनीक दो अलग-अलग स्विचों का प्रयोग करते हुए AC इनपुट को दो प्राइमरी टैप से कनेक्ट करती है।

जब इससे लोड कनेक्ट होता है तो प्राइमरी वाइंडिंग की वजह से यह ऑटो ट्रांसफार्मर में तब्दील हो जाता है। इसमें बैटरी ओवर वोल्टेज अवस्था में और लो वोल्टेज अवस्था में लगातार चार्ज होती रहती है। ऑटो ट्रांसफार्मर का निर्माण इस तरह से किया जाता है कि वे अलग-अलग तरह की वोल्टेज इनपुट को हैंडिल करने में सक्षम होते है। इनकी रेंज 120 V पॉवर के लिये 90 V से लेकर 140 V तक होती है। यदि वोल्टेज इससे ऊपर या नीचे होती है तो ये बैटरी पर जाते हैं।

⇨ स्टैंडबाइ यूपीएस/ऑफ लाइन यूपीएस स्टैंडबाइ यूपीएस को ऑफ लाइन यूपीएस भी कहते हैं। यह कम्प्यूटर को पहले को सीधे मेन लाइन से पॉवर सप्लाई करता है और इसका बैटरी से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। लेकिन जब बिजली चली जाती है तो यह बैटरी को प्रयोग करने लगता है और उसके DC करेंट को AC में बदलकर कम्प्यूटर को सप्लाई करता है। यह घरों में प्रयोग किये जाने वाले इंवर्टर की तरह से होता है।

वर्तमान समय में 1KVA से कम शक्ति के ज्यादातर यूपीएस लाइन इंट्रैक्टिव या स्टैंडबाइ होते हैं। इनके ज्यादा प्रयोग का कारण इनका कम महंगा होना है।

इन UPS सिस्टमों में जो मेन विद्युत सप्लाई होती है वह इससे होती हुई सीधे-सीधे यूपीएस से जुड़े कम्प्यूटर तक जाती है। जब इसमें आने वाली मेन विद्युत आपूर्ति फेल हो जाती है या यह ज्यादा उतार चढ़ाव वाली (अर्थात इसके लिये जरूरी स्तर से कम या ज्यादा) हो जाती है तो इसमें लगा DC-AC इंवर्टर सर्किट चालू हो जाता है और यूपीएस से जुड़ी बैटरी की पॉवर को AC पॉवर में बदलकर सप्लाई करने लगता है।

इसमें यूपीएस मैकेनिकली रूप से DC – AC स्विचिंग करता है और इसका स्विच ओवर टाइम 25 मिलीसेकेंड होता है। इस यूपीएस को सबसे ज्याजा पर्सनल कम्प्यूटरों के साथ प्रयोग किया जाता है और इससे प्राप्त होने वाले करेंट में कोई विशेष व्यवधान नहीं होता है।

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