Answer for इंटरनेट रिले चैट (IRC) से आप क्या समझते है

  • इंस्टेन्ट मैसेजिंग को आप ई-मेल का छोटा रूप कह सकते हैं। यह सुविधा वेब में जुड़ी होती है और इसे एक विशेष सॉफ्टवेयर इंस्टेंट मैसेंजर के द्वारा भी प्रयोग कर सकते हैं। वर्तमान समय में आप इस सुविधा के लिये प्रयोग किये जाने वाले प्रोग्राम याहू मैसेन्जर से अवश्य परिचित होंगे। यह आपको तत्काल टेक्स्ट मैसेज भेजने की सुविधा प्रदान करता है। इससे आप अपने किसी भी दोस्त को जो इंटरनेट प्रयोग कर रहा है को संदेश भेज सकते हैं। इसमें इतनी शर्त होती है कि आप जिस व्यक्ति को संदेश भेज रहे हैं वह ऑन लाइन हो और उसी सेवा का उपयोग कर रहा हो जिसका आप कर रहे हैं। यदि इसकी तुलना ई-मेल से करें तो ई-मेल में संदेश पाने वाले व्यक्ति को ऑनलाइन रहने की जरूरत नहीं है।

 
आज आप इंस्टेंट मैसेजिंग के जिस रूप को प्रयोग कर रहे हैं वह वास्तव में इंटरनेट रिले चैट से विकसित हुआ है। इसका प्रयोग ईमेल के बाद सबसे ज्यादा किया जाता है। इसमें एक ही समय में एक से अधिक लोंगों से ऑनलाइन सम्पर्क किया जा सकता है। अब तो इसके द्वारा ध्वनि और इमेज को भी भेज सकते हैं। आइये इसकी कार्य-प्रणाली को समझें। .
 
जैरको ओईकैरीनेन ने 1998 में इंटरनेट रिले चैट की शुरुआत की और चैट प्रणाली की दुनिया में एक नई क्रांति को जन्म दिया। इंस्टैंट मैसेजिंग सेवा कितनी लोकप्रिय हुई है, इसका अनुमान सिर्फ इसी से लगाया जा सकता है कि हर महीने करीब तीस लाख नए यूजर इस सेवा को लेने के लिए आते जा रहे हैं। रोजाना एक अरब से भी ज्यादा इंस्टैंट मैसेजों का आदान-प्रदान हो रहा है। यह सब देखकर मन में सवाल पैदा होता है कि आखिर यह सब कुछ ही सेकेंड में या इससे भी कम समय में हो कैसे जाता है। इंस्टेंट मैसेंजर दो शब्दों से मिलकर बना शब्द है। इंस्टेंट का आशय तेजी से है तथा मैसेंज़र का आशय संदेशवाहक से है। आज इंस्टेंट मैसेंज़र सिर्फ संदेश भेजने का जरिया ही नहीं रह गया है बल्कि यह उससे काफी आगे निकल चुका है। इसकी शुरुआत ICQ ने की थी। उस वक्त ICQ आपके मित्र के ऑनलाइन होने की खबर देता था, जिससे आप उसे तुरंत संदेश भेज सके। उस वक्त इसे इंटरनेट पेजर कहा जाता था आज यह उससे अधिक कहीं अधिक सक्षम हो चुका है।
 
दूरियां चाहें हजारों किलोमीटर की क्यों न हों, लेकिन संदेश पहुंचने में सेकेंड भी नहीं लगते। विश्व के विशालकाय भूभाग में संदेशों का यह आदान-प्रदान सर्वरों के माध्यम से होता है।
 
– पूरी दुनिया में ये मैसेज कॉपर और फाइबर कनेक्टरों के माध्यम से चलते हैं और इनकी गति प्रकाश की गति की दोतिहाई होती है। यह तो हम जानते ही हैं कि प्रकाश की गति 1,86,000 मील प्रतिसेकेंड है। अब इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि सेकेंड से भी बहुत कम समय में आप तक संदेश क्यों पहुंच जाते हैं।
 
→ सर्वरों के बीच संदेशों के प्रसारण की वजह से जो देरी इसमें होती है, वह इसमें कहीं नहीं मिलेगी। दो लोग आपस में बात कर सकें, इसके लिए यह आवश्यक है कि दोनों के बीच भाषा एक ही हो। इसी तरह दो प्रोग्रामों की बीच संचार या संवाद स्थापित हो सके, इसके लिए साझा मिलन जरूरी है, जिसे कि तेकनीकी भाषा में प्रोटोकॉल कहा जाता है। [समस्टर-चार अध्याय-बारहः वेब सर्वर, मैसेजिंग सर्विस, बैकअप और रिकवरी
 
→ सर्वरों के बीच संदेशों के प्रसारण की वजह से जो देरी इसमें होती है, वह इसमें कहीं नहीं मिलेगी। दो लोग आपस में बात कर सकें, इसके लिए यह आवश्यक है कि दोनों के बीच भाषा एक ही हो। इसी तरह दो प्रोग्रामों की बीच संचार या संवाद स्थापित हो सके, इसके लिए साझा मिलन जरूरी है, जिसे कि तेकनीकी भाषा में प्रोटोकॉल कहा जाता है। [समस्टर-चार अध्याय-बारहः वेब सर्वर, मैसेजिंग सर्विस, बैकअप और रिकवरी
चैट क्लाइंट और सर्वर के बीच कम्युनीकेशन का क्या तरीका हो, यह प्रोटोकॉल ही निर्धारित करता है। ज्यादातर इंस्टैंट मैसेंजर अपने खुद के ही प्रोटोकॉलों का इस्तेमाल करते हैं।
→ यूजर जब तात्कालिक संदेश सेवा की प्रक्रिया प्रारम्भ करता है, तो इसके साथ ही दो चरणों की शुरुआत होती है। एक ऑथेंटिकेशन यानी प्रमाणिकता का चरण और दूसरा इंस्टैंट मैसेजिंग यानी तात्कालिक संदेश प्रसारण का चरण ।

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