उर्ध्वस्थिति पृष्ठचक्रासन कैसे करे

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itipapers Staff asked 3 years ago

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itipapers Staff answered 12 months ago

उर्ध्वस्थिति पृष्ठचक्रासन कैसे करे
उपरोक्त स्थिति में ही ऊपर उठकर पीछे की ओर झोंका खाने का प्रयास करो। इसी प्रकार आगे-पीछे झोंका खाएं। यह पेट की सभी बीमारियों को दूर करता है।

सुंडासन कैसे करे
आरम्भ में सीधे खड़े हो जाओ। दोनों हाथों के पंजे आपस में मिलाएं। अब हाथों को हाथी की सूंड की तरह दोनों पैरों के मध्य ले जाओ। यह क्रिया कम से कम पंद्रह-बीस बार करो। इससे पेट, छाती, पीठ, कमर के भागों, गर्दन और पैरों के विकार दूर हो जाते हैं।

धनुष्न पदमासन कैसे करे
पदमासन की स्थिति में बैठो। फिर पीठ पर हाथ बांधकर सीधे बैठो। फिर सामने झुककर ज़मीन पर सिर लगाओ। इस प्रकार फिर सीधे होकर आगे को झुको। इस आसन के अभ्यास से कमर मजबूत होती है और बढ़ा हुआ पेट कम हो जाता है।

पार्श्वभूनयनासन कैसे करे
पैरों के पंजों का पृष्ठ भाग ज़मीन पर टिका कर घुटनों को मिलाएं। इसके बाद एक तरफ झुककर दोनों हाथों की हथेलियां ज़मीन पर टिका कर दोनों हाथों के मध्य जमीन पर सिर टिकाएं। इसी प्रकार दूसरी बगल से भी यही क्रिया करो। इस योगासन से पसलियों के निचले भाग और पीठ, पेट दोष रहित हो जाते हैं।

विस्तृत भूनयनासन कैसे करे
दोनों पैरों को फैलाकर बैठो। अब हाथों से पैरों के अंगूठे पकड़ कर सिर जमीन पर टिका दो। इस अभ्यास से जांघे प्रदेश तन जाते हैं। टांगें, कमर, पीठ और पेट निर्विकार होकर वीर्य स्थिर होता है।

झूलासन कैसे करे
बायें पैर की एड़ी दायीं जांघ पर रखो और दायें पैर की एड़ी बायीं जांघ पर इस तरह लगाओ कि दोनों पैरों की एड़ियां आपस में मिल जाएं। इसके बाद दोनों हाथों की हथेलियों को ज़मीन पर रखकर सारे शरीर को ऊपर उठा दो और इस स्थिति में शरीर को झुलाओ। इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर पतली और लचकदार हो जाती है। नितम्बों का आकर्षण बढ़ जाता है। सीना चौड़ा हो जाता है। कन्धों की शक्ति बढ़ती है और क्लाइयां मज़बूत हो जाती हैं। दिल को बहुत ताकत मिलती है। अधिक मेहनत करने पर भी थकावट महसूस नहीं होती। पाचन क्रिया ठीक होने लगती है और शरीर के अन्दर खुशी की लहर दौड़ जाती है। भारी और बेडौल शरीर वाली औरतों एवं युवतियों के लिए सुडौल शरीर बनाने का यह उत्तम साधन है। . उपरोक्त आसन की एक दूसरी विधि भी है। इस विधि के अनुसार उकडूं होकर बैठ जाओ। दोनों हाथों की हथेलियां घुटनों के सामने ज़मीन पर टिका दो। पैरों का सारा भार (वज़न) पंजों पर रहना चाहिए। नितम्ब एड़ियों पर टिके रहने चाहिएं। सिर आगे को लटका हुआ नहीं होना चाहिए। कमर भी सीधी रहे। पैरों के पंजों पर अपने शरीर का भार तोलते हुए आगे को उछलने की क्रिया करो। इस आसन से हाथों, पैरों और कमर का अच्छा व्यायाम हो जाता है, इसलिए कब्ज और अपच आदि रोग दूर होते हैं। इसमें सारे शरीर का व्यायाम हो जाने से उत्साह बढ़ता है और निराशा दूर हो जाती है। इस आसन का नियमबद्ध अभ्यास करते रहने से औरतों को ल्यूकोरिया (प्रदर रोग) से मुक्ति मिल जाती है। योनि मजबूत हो जाती है, जांघे, कूल्हे और कमर आदि सुडौल एवं सुन्दर हो जाते हैं।

पार्श्वस्वस्थानासन कैसे करे
पेट के बल लेट जाओ। पैरों के अंगूठों को दोनों हाथों से पकड़ कर ऊपर की ओर उठा दो। ध्यान रहे कि पैरों और हाथों का भाग बिल्कुल सीधा हो जाये। इस क्रिया को आठ-दस बार करो। इस आसन के अभ्यास से शरीर की हड्डियों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। शरीर की मांसपेशियों को भरपूर ताकत मिलती है। इससे शरीर इतना मज़बूत हो जाता है कि किसी रोग का शरीर पर हमला नहीं होता और शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।

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