शरीर के मुख्य कितने भाग होते है

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itipapers Staff asked 3 years ago

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itipapers Staff answered 11 months ago

शरीर के मुख्य कितने भाग होते है
शरीर के मुख्य दो भाग हैं-
1. स्थूल भाग, जिसको शरीर कहते हैं।
2. सूक्ष्म भाग जिसको मन कहते हैं। योगासन के अभ्यास से मासपेशियां मज़बूत बनेंगी, शरीर सुडौल होगा, मज़बूत होगा और ताकतवर होगा। रोग-निवारक शक्ति में बढ़ोतरी होगी और मन शांत होगा। काम-क्रोध और वासना दूर भागेगी।

आसन के मुख्य कितने भाग होते है
आसनों के भी दो भाग हैं-
1. व्यायामात्मक
2. ध्यानात्मक। ध्यानात्मक आसनों से शरीर की कसरत तो नहीं होती यह आम ही होता है। इससे काम वासना को उत्तेजित करने वाले केन्द्र काबू हो जाते हैं। उनकी तीव्रता समाप्त हो जाती है और काम पर जीत प्राप्त हो जाती है, मन में से विकार निकल जाते हैं और शांति प्राप्त हो जाती है। इसलिए मन और शरीर दोनों उचित रूप में शुद्ध, स्वस्थ और मज़बूत होते हैं। ज्ञान का सूर्य उदय होता है। आत्मा की उन्नति की चाह तेज़ होती है। योगाभ्यास करने वाला नीच काम करने की बात मन में ला ही नहीं सकता। हमेशा ही मन में आत्मा की उन्नति की भावना करेगा। ऐसा व्यक्ति पूर्ण पुरुष कहलाने के योग्य होता है। आसनों का शरीर को तंदुरुस्त रखने में बहुत महत्त्व है। आसनों का नियमबद्ध अभ्यास करने से बहुत सारे ला-इलाज कहे जाने वाले रोग जड़ से ही नष्ट होते देखे गये हैं। शरीर तंदुरुस्त न हो न तो भौतिक उपलब्धि हो सकती है न ही आध्यात्मिक। शरीर ही सब उपलब्धियों का माध्यम है। इसलिए कसरती आसनों का महत्त्व कम नहीं है। सबसे बड़ी उपलब्धि आत्मा के साक्षात्कार का मार्ग कसरती आसन खोलते हैं। ध्यानात्मक आसन भी कसरती आसनों जैसा कुछ लाभ पहुंचाते हैं, परन्तु उन आसनों में देर तक बैठकर ध्यान करने की आसानी है। इसी कारण इनको ध्यानात्मक आसन कहा गया है। कसरती आसन करते समय लंगोट पहन लेना अच्छा होता है। इससे सब अंग कसे रहते हैं। यदि किसी की आंत उतरती हो या ऐसी कोई दूसरी खराबी हो तो उसके लिए पूरा बचाओ रखकर आसन करना चाहिए। ऐसा न हो कि आसन करते समय उन खराब अंगों पर दबाव पड़े और उनमें दूसरे रोग हो जायें। पद्म आसन या सिद्ध आसन करते समय अड्डी को गुदा और अंडकोश के बीच खाली जगह पर रखना होता है, उसको रखते – समय पूरी सावधानी रखनी चाहिए ताकि वहां के नाजुक अंग को नुकसान न पहुंचे। 4. जो व्यक्ति किसी रोग के इलाज के साधन के रूप में आसन करना चाहते हों, वे भी सावधानीपूर्वक अभ्यास करें,जो दवाई या इलाज जो कि वे आसन से पहले करते रहे हों, उनको जारी रखें, बंद न करें। क्योंकि आसनों का लाभ तो तीन-चार महीनों के बाद ही पता लगेगा। एकदम इलाज बंद करने से रोग के बढ़ जाने का डर रहता है। … शूगर (डायबिटीज़) का इलाज जो लोग आसनों द्वारा करना चाहते हैं, उनको भी अपना पूर्व वाला इलाज जारी रखना चाहिए और हर महीने मूत्र परीक्षण करवाते रहना चाहिए। जब शूगर कन्ट्रोल हो जाये तब बाहरी इलाज बंद कर देना चाहिए। ऐसे रोगी को अपने खाने-पीने का ध्यान रखना चाहिए और जो हर्नियों के कारण पेटी (बैल्ट) लगाते हों, उनको आसन करने से पूर्व बैल्ट लगा लेनी चाहिए, इससे सुरक्षा रहती है। नये अभ्यास करने वालों को शरीर के अंगों को मोड़ने और संचालन में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। अंगों को धीरे-धीरे मोड़ने की कोशिश करनी चाहिए और उनको उतना ही मोड़ना चाहिए जितना आसानी से मुड़ सकें। नये अभ्यास करने वालों को आसन की पूर्ण अवस्था प्राप्त करने में महीनों का समय लग जाता है। पश्चिमोत्तान की पूर्णता को पहुंचने में कई महीने लग जाते हैं। म्यूर आसन मुश्किल से बहुत दिनों के बाद जा कर सिद्ध होता है। मये अभ्यासी को नियमपूर्वक हर रोज़ आसन करते रहना चाहिए। जैसे-जैसे अंगों की लोच बढ़ेगी त्यों-त्यों स्थिति सरल होती जायेगी। जो लोग मांसपेशियों को मजबूत बनाना चाहते हों, उनको आसनों के अलावा डंड-बैठकें आदि कसरतें भी . करनी चाहिएं, परन्तु आसन और डंड-बैठकें साथ-साथ नहीं करनी चाहिएं। यदि समय की कमी हो तो आधे घण्टे के अन्तर से करना चाहिए। ऊपर बताई गई सभी बातें और निर्देश योग अभ्यास करने के लिए मानने योग्य हैं। जो लोग सभी क्रियाएं और उनके नियमों को अच्छी तरह समझ कर साधना शुरू करते हैं, वे उसका पूरा-पूरा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। .

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